अंतर्जात बल (Endogenetic Force) एवं बहिर्जात बल (Exogentic Force)

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सामान्य परिचय
पृथ्वी की सतह अस्थाई और परिवर्तनशील है।भूपटल पर पाई जाने वाली विभिन्न भू आकृतियां पर्वत, पठार, मैदान, महाद्वीप,महासागर आदि सब परिवर्तनशील है। उदाहरण के लिए आज जहां पर हिमालय पर्वत स्थित है वहां पर 20 करोड़ वर्ष पूर्व टेथीस सागर था। भूपटल पर भू-आकृतियों के विनाश और निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। भूपटल पर भू आकृतियों के विनाश तथा निर्माण के लिए बलों की आवश्यकता होती है। इन बलों की उत्पत्ति दो स्रोतों से होती है। पृथ्वी के आंतरिक परतों में विभिन्न कारकों के प्रभाव से उत्पन्न बल को अंतर्जात बल तथा पृथ्वी की सतह पर वाह्य कारकों के प्रभाव से उत्पन्न बल को बहिर्जात कहते हैं। अंतर्जात बलों के द्वारा पृथ्वी की सतह पर भू आकृतियों का निर्माण होता है तथा विषमताएं उत्पन होती है, अत: इसे निर्माणकारी बल भी कहते हैं। वहीं पर बहिर्जात बलों के द्वारा पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न विषमताओं को दूर किया जाता है अतः इसे विनाशकारी बल भी कहा जाता है।
अंतर्जात बल (Endogenetic Force)
- ये बल पृथ्वी के आंतरिक परतों में ही उत्पन्न होते हैं। इन बलों के उत्पत्ति का मुख्य कारण पृथ्वी के आंतरिक परतों में ताप, दाब, घनत्व में परिवर्तन, रेडियोधर्मी तत्वों का विघटन, मैग्मा के संचलन के कारण उत्पन्न संवहन तरंगों की उत्पत्ति आदि है।
- बल की तीव्रता के आधार पर अंतर्जात बलों को आकस्मिक संचलन तथा पटल विरूपण संचलन में विभाजित किया जाता है।
- अधिक तीव्रता वाले बल के कारण आकस्मिक संचलन के द्वारा भूतल के ऊपर तथा नीचे अचानक परिवर्तन होते हैं। आकस्मिक संचलन का प्रमुख कारण भूकंप तथा ज्वालामुखी क्रियाएं हैं। उदाहरण के लिए जहां ज्वालामुखी क्रिया के द्वारा धरातल के नीचे सिल,डाइक,फैकोलिथ,लैकोलिथ, लोपोलिथ आदि के रूप में चट्टानी का निर्माण होता है, वहीं धरातल के ऊपर लावा के प्रवाह के कारण लावा पठार, लावा मैदान और विभिन्न प्रकार के शंकुओ का निर्माण होता है। भूकंप के कारण पृथ्वी की सतह पर सागर, झील आदि का निर्माण होता है।
- कम तीव्रता वाले बल के कारण पटल विरूपण संचलन होता है। इसके द्वारा क्षैतिज तथा लंबवत दोनों गतियां होती हैं। पटल विरूपण संचलन बल अत्यंत मंद गति से कार्य करते हैं इस कारण इनका प्रभाव हजारों वर्षों बाद भूतल पर दिखाई पड़ता है तथा बृहद स्थलाकृतियों का निर्माण होता है। क्षेत्रीय विस्तार की की दृष्टि से पटल विरूपण संचलन बल को दो भागों में विभाजित किया जाता है। 1. महादेशीय संचलन (epieirogenetic movement) 2. पर्वतीय संचलन (orogenetic movement)
1. महादेशीय संचलन (Epieirogenetic Movement)
- Epieirogenetic शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्द एपीरोस (epeiros) जिसका अर्थ है-महाद्वीप तथा जेनेसिस (Genesis) जिसका अर्थ है- उत्पत्ति,से मिलकर बना है।
- इस संचलन के द्वारा महाद्वीपीय भागों का निर्माण एवं उसमें उत्थान या निर्गमन तथा अवतलन या निमज्जन की क्रियाएं होती है।
- महादेशजनक संचलन के अंतर्गत उत्थान की प्रक्रिया के द्वारा जब स्थल खंड का कोई भाग आसपास की सतह की अपेक्षा ऊपर उठ जाता है तब महाद्वीपीय पठार की उत्पत्ति होती है। वहीं निर्गमन की प्रक्रिया के द्वारा महाद्वीपीय मग्नतट का जल की सतह से बाहर आने पर तटीय मैदान का निर्माण होता है। उदहारण- स्वीडन के दक्षिण पूर्वी भाग का पिछले 100 वर्षों में लगभग 1 मीटर ऊपर उठना, प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर में प्रवाल भित्तियों का समुद्र तल से अधिक ऊंचाई पर मिलना,निर्गमन के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। भारत के कठियावाड़ प्रायद्वीप , मुंबई तथा पुद्दुचेरी के तटीय भागों में उत्थान के प्रमाण मिलते हैं।
- महादेशजनक संचलन के अंतर्गत अवतलन की प्रक्रिया के द्वारा जब स्थलखंड का कोई भाग आस-पास की सतह की अपेक्षा नीचे धंस जाता है तब महाद्वीपीय बेसिन की उत्पत्ति होती है। जबकि वहीं निमज्जन प्रक्रिया के द्वारा महाद्वीपीय तट के जलमग्न हो जाने के कारण महाद्वीपीय मग्नतट का निर्माण होता है। उदाहरण- समुंद्र तल के नीचे कोयले के भंडार , जलमग्न वन आदि का मिलना निमज्जन के प्रत्यक्ष प्रमाण है।
2. पर्वत निर्माणकारी संचलन (Orogenetic Movement)
- ओरोजेनेटिक शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। ओरोज (oros) जिसका अर्थ है- पर्वत तथा जेनेसिस (genesis) जिसका अर्थ है- उत्पत्ति। अर्थात ये संचलन पर्वतों के निर्माण से संबंधित हैं।
- पर्वत निर्माणकारी संचलन क्षैतिज दिशा में लगने वाले बलों के कारण होता है। इसके तहत चट्टानों में संपीडन तथा तनावमूलक बल कार्य करता है, जिसके परिणामस्वरूप पर्वतों की उत्पत्ति होती है।
- जब दो बल क्षैतिज तथा विपरीत दिशा में कार्यरत होते हैं तो उनके प्रभाव से तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है, इस तरह लगने वाले बल को तनावमूलक बल कहते हैं। चट्टानों में तनाव से भ्रंश, दरार तथा चटकन का निर्माण होता है।
- जब दो बल क्षैतिज तथा एक ही दिशा में आमने सामने कार्यरत होते हैं तो उनके प्रभाव से चट्टानों में संम्पीडन होने लगता है, इस तरह लगने वाले बल को संम्पीडनात्तमक बल कहते हैं।
बहिर्जात बल (Exogentic Force)
- पृथ्वी की सतह पर वाह्य कारकों के प्रभाव से उत्पन्न बल को बहिर्जात बल कहते हैं। जहां अंतर्जात बलों के कारण पृथ्वी की सतह पर विषमता की उत्पत्ति होती है, वही इसके विपरीत बहिर्जात बलों के द्वारा पृथ्वी की सतह पर समतल की स्थापना होती है।
- बहिर्जात बलों का पृथ्वी की सतह पर प्रमुख कार्य अनाच्छादन होता है। इसके अंतर्गत अपक्षय तथा अपरदन की सम्मिलित क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।